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कार न्यूज़24 अक्टूबर 2026

2030 से नई कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग अनिवार्य: सरकार का प्रस्ताव जारी — 2032 तक हर मॉडल पर लागू होगा नियम

सरकार का प्रस्ताव: 2030 से नई कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग अनिवार्य

अगले दशक में भारत में बिकने वाली हर नई कार पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित हो सकती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 19 अक्टूबर 2026 को एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें प्रस्ताव है कि 1 अक्टूबर 2030 से भारत में लॉन्च होने वाले सभी नए पैसेंजर कार मॉडलों में Advanced Emergency Braking System (AEBS) अनिवार्य होगा। उत्पादन में पहले से मौजूद मॉडलों के लिए यह नियम 1 अक्टूबर 2032 से लागू होगा। यह प्रस्ताव सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन के तौर पर लाया गया है।

टाइमलाइन चरणबद्ध रखी गई है ताकि कंपनियों को तैयारी का समय मिले। 1 अक्टूबर 2028 से ही AEBS लगी M1 और N1 कैटेगरी की गाड़ियों को AIS-185 मानक पर खरा उतरना होगा; यानी 2030 का नियम उसी मानक पर लागू होगा। इसके साथ ही मध्यम और भारी ट्रकों के लिए भी कड़े नियम प्रस्तावित हैं — 1 अक्टूबर 2027 से ट्रकों में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC, AIS-162 मानक) अनिवार्य होगा और नई ब्रेकिंग मानक भी लागू होंगे। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर 30 दिनों तक जनता और उद्योग के सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद ही नियम फाइनल होगा।

नियम की टाइमलाइन — कब क्या अनिवार्य होगा
तारीखकिस पर लागूनियम
1 अक्टूबर 2027ट्रक (मध्यम/भारी)इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (AIS-162) + नई ब्रेकिंग मानक
1 अक्टूबर 2028AEBS लगी M1/N1 गाड़ियांAIS-185 तकनीकी मानक अनिवार्य
1 अक्टूबर 2030नए पैसेंजर कार मॉडल (M1)AEBS (AIS-185) अनिवार्य
1 अक्टूबर 2032उत्पादन में मौजूद सभी मॉडलAEBS (AIS-185) अनिवार्य

AEBS आखिर करता क्या है? यह एक ऑटोमैटिक इमरजेंसी ड्राइवर-असिस्ट तकनीक है जो कैमरा, रडार या सेंसर से आगे की सड़क पर नज़र रखती है और गाड़ी, पैदल यात्री या दोपहिया जैसी बाधाओं को पहचानती है। टक्कर का खतरा दिखते ही सिस्टम पहले ड्राइवर को चेतावनी देता है, और अगर ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया नहीं देता, तो खुद अपने-आप ब्रेक लगा देता है। हालात के हिसाब से यह टक्कर को पूरी तरह टाल सकता है या कम से कम टक्कर की गंभीरता घटा देता है। यह सावधान ड्राइवर की जगह नहीं लेता, बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा जाल है।

AEBS कैसे काम करता है
चरणक्या होता है
1. नज़र रखनाकैमरा/रडार आगे की सड़क की निगरानी करते हैं, गाड़ी-पैदल-दोपहिया की पहचान
2. चेतावनीटक्कर का खतरा दिखते ही ड्राइवर को तुरंत वॉर्निंग
3. ऑटो ब्रेकजवाब न मिले तो खुद ब्रेक — टक्कर टले या चोट कम हो

यह प्रस्ताव सिर्फ ब्रेकिंग तक सीमित नहीं है। ड्राफ्ट में टैक्सियों समेत गाड़ियों के लिए इमरजेंसी लेन-कीपिंग, स्टीयरिंग असिस्टेंस और ड्राइवर की थकान या असावधानी पर अलर्ट जैसे अतिरिक्त ड्राइवर-असिस्ट फीचर्स के नियम भी प्रस्तावित हैं — मकसद ड्राइवर की थकान से होने वाली दुर्घटनाएं घटाना है।

प्रस्तावित ADAS फीचर्स — AEB के अलावा
फीचरमकसद
एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंगअचानक आई बाधा पर अपने-आप ब्रेक
इमरजेंसी लेन-कीपिंगलेन से भटकने पर गाड़ी को सुधारना
स्टीयरिंग असिस्टेंसज़रूरत पर ड्राइवर की स्टीयरिंग में मदद
ड्राइवर थकान अलर्टउनींदापन या असावधानी पर चेतावनी

सरकार का यह कदम सड़क दुर्घटनाओं के गंभीर आंकड़ों के बीच आया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 2025 में भारत में 5.13 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हाल में कह चुके हैं कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में 50% की कटौती है — और AEBS जैसे नियम उसी लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

खरीदारों के लिए इसका मतलब क्या है? आज भारत में ADAS ज़्यादातर ₹9 लाख से ऊपर की कारों में मिलता है — सबसे सस्ती ADAS वाली कारों में Honda Amaze, Maruti Baleno और Toyota Glanza जैसे नाम आते हैं। 2030 के बाद हर नई कार में AEB स्टैंडर्ड होगा, यानी एंट्री-लेवल खरीदार को भी यह सुरक्षा मिलेगी। हां, सेंसर और सॉफ्टवेयर की लागत से शुरुआती कीमतों पर कुछ दबाव पड़ सकता है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन से यह लागत धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। एक बात साफ है — 2030 के बाद कार खरीदते वक़्त "सुरक्षा फीचर्स" की सूची में AEB अपने-आप टिक मिलेगा।

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